कोशिका किसे कहते हैं | Koshika Kise Kahate Hain

अनुक्रमणिका

कोशिका किसे कहते हैं, कोशिका किसे कहते हैं Class 9 | Koshika Kise Kahate Hain

कोशिका का बायोलॉजिकल नाम Cyto होता है, जबकि इसे अंग्रेज़ी में (Cell) कहते हैं, जिसे लैटिन भाषा के ‘शेलुला’ शब्द से लिया गया है, जिसका सामान्य अर्थ होता है “एक छोटा-सा कमरा”, कोशिका के बारे में अध्धयन Cytology कहलाता है।

कोशिका में स्वतः जनन की क्षमता होती है, अर्थात नई कोशिकाओं की उत्पत्ति पूर्ववर्ती कोशिकाओं के विभाजन से होता है, इसे ही कशिकीय विभाजन कहते हैं। यह जीवों के उत्पादन, उत्सर्जन और जीवनचक्र के विकास में सहायक सभी जैविक क्रियाओं के विकास में सहायक होती है।

कोशिका (सेल्स) जीवन की बेसिक स्ट्रक्चरल एवं फंक्शनल यूनिट है। पृथ्वी पर रहने वाले माइक्रोब्स से लेकर विशाल जीव तक सभी कोशिकाओं से मिलकर बने है। कोशिकाओं के भीतर ही वह सारी क्रियाएं होती है जो एक जीव को जीवन प्रदान करने के लिए आवश्यक होते हैं।

कोशिका की खोज किसने की | Koshika Ki Khoj Kisne Ki, Koshika Ki Khoj Kisne Ki Thi, koshika ki khoj kisne aur kaise ki

ऊपर हमने पढ़ा कि कोशिका किसे कहते हैं? (Koshika Kise Kahate Hain), अब कोशिका की संरचना पढ़ लेते हैं। कोशिका की खोज सबसे पहले राबर्ट हुक ने 1665 ई. में की थी, उन्होंने सूक्ष्मदर्शी की मदद से कॉर्क के टुकड़े की कोशिका देखी थी, लेकिन ल्यूवेनहाक सन 1674 ई. में पहली बार बैक्टीरिया के रूप में मुक्त कोशिकाओं की खोज की थी।

सन 1831 ई. में राबर्ट ब्राउन ने कोशिका में केन्द्रक (Nucleus) की खोज की थी। जिसके बाद सन 1838 ई. में मैथियास श्लाइडेन नमक वैज्ञानिक ने कोशिका पर निरिक्षण किया और बताया की, जीवधारियो का शरीर अनेक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है और कोशिका मिलकर उत्तक बनाते हैं।

कोशिका की खोज कोशिकाओं की खोज और उनका अध्ययन माइक्रोस्कोप के आविष्कार के बाद ही संभव हो पाया। सर्वप्रथम सन् 1665 में राबर्ट हुक नामक अंग्रेज़ वैज्ञानिक ने कोशिका की खोज की।

  • जब वह अपने ही बनाए हुए पुराने किस्म के माइक्रोस्कोप में पौधे के कॉर्क एक पतली क्रॉस सेक्शन की पढ़ाई कर रहे थे तो उन्हें छोटी-छोटी कम्पार्टमेंट्स दिखाई पड़ी जो मधुमक्खी के समान दिखाई पड़ रही थीं।
  • राबर्ट हुक ने इन खोखली कोठारिया को सेल का नाम दिया ।
  • सन् 1674 में ल्यूवेन हॉक नामक डच वैज्ञानिक ने अपने ही बनाए हुए एडवांस्ड प्रकार के माइक्रोस्कोप में स्वतंत्र कोशिका जैसे बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ, लाल रक्त कणिकाओं (रेड ब्लड सेल्स) एवं शुक्राणु (स्पेर्म्स), का अध्ययन किया।
  • रॉबर्ट ब्राउन ने सन् 1831 में पादप कोशिकाओं में केंद्रक को सर्वप्रथम देखा। जे.ई. परकिंजे ने सन् 1939 में कोशिकाद्रव्य का नाम प्रोटोप्लास्ट रखा।
  • सन् 1866 में हैकेल ने यह सिद्ध किया कि केंद्रक के भीतर हेरेडिटरी ट्रेट्स का कलेक्शन होता है। आगे चलकर अनेक वैज्ञानिकों ने कोशिका के विभिन्न घटकों की रचना एवं कार्य की जानकारी दी।

कोशिका क्या है परिभाषा | Koshika Ki Paribhasha

कोशिका सभी जीवित प्राणियों की एक मौलिक, संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई होती हैं। 1665 में, रॉबर्ट हुक ने एक कॉर्क के पेड़ की छाल की जांच करते हुए कोशिका के बारे में पता लगाया था। इसलिए उन्हें कोशिका के खोजकर्ता के रूप में जाना जाता है।

क्यूंकि कोशिकाएं मौलिक इकाइयां हैं, इसलिए उनमे कई प्रकार की समान विशेषताएं पायी जाती हैं, जैसे कि- कोशिकाओं का विकसित होना,  बढ़ना, उपापचय, और प्रजनन करने की क्षमता इत्यादि। 

कोशिकाओं की प्रमुख विशषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • कोशिकाओं में DNA के रूप में संग्रहीत आनुवंशिक जानकारी होती है। अर्थात कोशिकाओं से अनुवांशिकता का पता लगाया जा सकता है।
  • कोशिकाओं के भीतर होने वाली प्रक्रियाओं के माध्यम से ही हर प्राणी अपने बुनियादी और महत्वपूर्ण कार्य करने में सक्षम हो पाते हैं।
  • कोशिकाएं संरचनात्मक निर्माण कार्यों में भी महत्वपूर्ण हैं, इन्ही के कारण अंगों और ऊतकों को आकार मिलता है।
  • राइबोसोम का उपयोग करके कोशिकाएं प्रोटीन का संश्लेषण करती हैं।
  • कोशिकाएं एक प्लाज्मा झिल्ली द्वारा घिरी होती हैं, लेकिन वो अपने बहरी वातावरण से सम्पर्क रखती हैं।
  • कोशिकाओं के पास जैवाणु (Biomolecule) से बना एक उपापचय होता है।
  • बैक्टीरिया को प्राणियों की तरह कोशिकाओं की आवश्यकता नहीं होती है। वहीँ कुछ प्राणी ऐसे हैं जिन्हे केवल एक कोशिका की आवश्यकता होती है। इस प्रकार के जीवों को एककोशिकीय जीव कहा जाता है।
  • इसके अतिरिक्त पृथ्वी पर बहुत सारे सजीव ऐसे हैं, जिन्हे जीवित रहने के लिए कई प्रकार की कोशिकाओं की आवश्यकता होती है, इन्हे बहुकोशिकीय जीव कहा जाता है। 

कोशिकाओं की इन्ही विशेषताओं के कारण विभिन्न प्रकार के जीवों में विभिन्न प्रकार की कोशिकाएं पायी जाती हैं, और हम उन कोशिकाओं को उनके गुणों के आधार पर विभाजित कर सकते हैं।

कोशिका कितने प्रकार के होते हैं | Koshika Kitne Prakar Ki Hai

कोशिकाओं की विशेषताओं के आधार पर हम उन्हें 2 वर्गों में विभाजित कर सकते हैं।  अर्थात हम यह कह सकते हैं कि कोशिकाएं 2 प्रकार की होती हैं, जो निम्नलिखित हैं-

  • यूकैरियोटिक कोशिकाएं (Eukaryotic cell)
  • प्रोकैरियोटिक कोशिकाएं (Prokaryotic cell)

कोशिकाओं का पहला वर्गीकरण केंद्रक की उपस्थिति या उनकी अनुपस्थिति पर निर्भर करता है। इस वर्गीकरण के अनुसार, हम कोशिकाओं को प्रोकैरियोटिक और यूकेरियोटिक कोशिकाओं में विभाजित करते हैं।

प्रोकैरियोटिक कोशिका किसे कहते हैं | Prokaryotic Cells

ऐसी कोशिकाएँ जिनमे केन्द्रक कला नहीं पाया जाता है तथा जिनकी केन्द्रकीय पदार्थ कोशिका द्रव में बिखरे होते हैं, उन्हें प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ कहते हैं। इन कोशिकाओं में सुसंगठित केन्द्रक (Nucleus) नहीं पाया जाता। इनमें क्रोमेटिन (Chromatin) पदार्थ गुणसूत्रों (Chromosomes) में संगठित नहीं होता।

यह केवल डी.एन.ए. (D.N.A.) सूत्र के रूप में पाया जाता है। इसके अलावा प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में कलाबद्ध कोशिकांग (जैसे-माइटोकॉण्ड्रिया, गॉल्जीकाय, लवक आदि) अनुपस्थित होते हैं। बैक्टीरिया एवं नीले-हरे शैवालों में ये कोशिकाएँ पाई जाती है।

प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं की मुख्य विशेषताएं हैं:

  • उनके पास नाभिक नहीं होता है|
  • इनके अंगों में झिल्ली नहीं होती है।
  • इसकी बाहरी सीमा में एक पेप्टिडोग्लाइकन कोशिका भित्ति (peptidoglycan cell wall) होती है, जो इसे कठोरता देती है|
  • इसमें साइटोस्केलेटन नहीं होता है जिस कारण से उनके अंग कोशिका द्रव्य में व्यवस्थित होते है।
  • इनके पास एक ऐसा निकाय होता है, जो आवश्यकता पड़ने पर पोषक तत्वों को संग्रहीत करता है, और काम पड़ने पर उनको प्रयोग में लाता है।

यूकैरियोटिक कोशिकाएँ | Eukaryotic Cells

ऐसी कोशिकाएँ जिनकी रचना में दोहरी झिल्ली के तथा केंद्रक आवरण होता है, यह झिल्ली कोशिका नाभिक को सीमांकित करती है जिसमे इसकी अधिकांश आनुवंशिक सामग्री (DNA) मौजूद होता है। इन कोशिकाओं में सुगठित केन्द्रक पाया जाता है जो केन्द्रक-कला (Nuclear membrane) से घिरा होता है।

इसके अतिरिक्त इन कोशिकाओं में माइटोकॉण्ड्रिया, गॉल्जीकाय, लवक आदि सभी कलाबद्ध कोशिकांग होते हैं। बैक्टीरिया तथा नीले-हरे शैवालों के अतिरिक्त सभी जीवों की कोशिकाएँ यूकैरियोटिक होती हैं। कोशिका भित्ति (Cell Wall) और केंद्रक (Nucleus) इसके महत्त्वपूर्ण भाग हैं।

  • यूकैरियोटिक कोशिका में एक नाभिक उपस्थित होता है। इस नाभिक में प्रत्येक जीव की आनुवंशिक जानकारी समाहित होती है, जिसे गुणसूत्रों में भी व्यवस्थित किया जाता है। इसके अंगों में एक झिल्ली भी होती है। इस प्रकार की कोशिकाओं में RNA (Ribonucleic acid) संश्लेषण नाभिक में होता है, और प्रोटीन को साइटोप्लाज्म में राइबोसोम द्वारा संश्लेषित किया जाता है|
  • इस प्रकार की कोशिकाओं में सूक्ष्मनलिकाओं (Microtubules) से बना एक बहुत ही विकसित साइटोस्केलेटन प्राप्त होता है। यह साइटोस्केलेटन उन अंगो की सहायता करता है, जो कोशिकाओं के कार्य में मदद करते हैं।
  • इस प्रकार की कोशिकाओं में जो सबसे महत्वपूर्ण है, वह माइटोकॉन्ड्रिया है। यहाँ शरीर के लिए ऊर्जा का उत्पादन होता है।
  • यूकेरियोटिक कोशिकाओं के साइटोप्लाज्म के भीतर खुरदुरा एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Rough endoplasmic reticulum -RER) होता है, जिसमें प्रोटीन संश्लेषण के लिए राइबोसोम होते है। इसके अतिरिक्त चिकने एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Smooth endoplasmic reticulum- SER) होते हैं, जो लिपिड को संश्लेषित करता है, और कोशिकाओं से विषाक्त पदार्थों को निकालते हैं।
  • गॉल्जी तंत्र का कार्य अन्य जीवों से प्राप्त उत्पादों को संसाधित और उनका परिवहन करना होता है, ताकि कोशिका में या इसकी सतह पर उपयोग के लिए तैयार पुटिकाएं बनाई जा सकें।
  • इस प्रकार की कोशिकाओं में अणुओं को संसाधित करने के लिए एंजाइम के साथ लाइसोसोम (Lysosomes) होते हैं।
  • इनके पास तारककेंद्रक (Centrioles) भी होते हैं, जो अर्धसूत्रीविभाजन के दौरान माइटोटिक स्पिंडल (mitotic spindle) बनाने के लिए आवश्यक होते हैं।
  • उनके पास सिलिया या फ्लैगेला (Cilia or Flagella) हो सकता है, जो विस्तार वाली कोशिकाएं होती हैं और ये कणों को स्थानांतरित करती हैं।

प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर | Difference Between Prokaryotic and Eukaryotic Cells

विशेषताप्रोकैरियोटिकयूकैरियोटिक
कोशिका भित्तिप्रोटीन तथा कार्बोहाइड्रेट की बनी होती है.सेलुलोस की बनी होती है.
माइटोकॉन्ड्रियाअनुपस्थित होता है.उपस्थित होता है.
एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलमअनुपस्थित होता है.उपस्थित होता है.
राइबोसोम705 प्रकार के होते हैं.805 प्रकार के होते हैं.
गॉल्जीकायअनुपस्थित होते हैं.उपस्थित होते हैं
केन्द्रक झिल्लीअनुपस्थित होती है.उपस्थित होती है.
लाइसोसोमअनुपस्थित होते हैं.उपस्थित होते हैं.
डी.एन.एएकल सूत्र के रूप में.पूर्ण विकसित एवं दोहरे सूत्र के रूप में.
कशाभिका  केवल एक तन्तु होता है.कुल 11 तन्तु होते हैं.
केन्द्रिकाअनुपस्थित होती है.उपस्थित होती है.
सेंट्रीयोलअनुपस्थित होता है.उपस्थित होता है.
श्वसनप्लाज्मा झिल्ली द्वारा होता है.माइटोकॉन्ड्रिया द्वारा होता है.
लिंग प्रजनननहीं पाया जाता है.पाया जाता है.
प्रकाश-संश्लेषणथायलेकोइड में होता है.क्लोरोप्लास्ट में होता है.
कोशिका विभाजनअसूत्री प्रकार का होता है.समसूत्री प्रकार का होता है.
प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर

कोशिका के कार्य | Koshika Ka Karya

कोशिका तीन महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करती है: 

  • यह अपने पर्यावरण के साथ सम्बन्ध स्थापित करती है, 
  • ये प्रजनन करती है,
  • और ऊर्जा के लिए भोजन करती है। 

ये कार्य न केवल कोशिकाओं के अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं, बल्कि सभी जीवित प्राणियों के समुचित कार्य के लिए भी आवश्यक हैं। अब हम कोशिका के कार्यों को विस्तार रूप में समझेंगे-

बाहरी वातावरण से सम्बन्ध का कार्य

कोशिकाएं जीवित चीजों को अपने आसपास के वातावरण से जोड़ती हैं। वे इन कार्यों को बाहरी या आंतरिक उत्तेजनाओं की पहचान और प्रतिक्रिया के माध्यम से करती हैं। अर्थात जब बाहरी या आंतरिक वातावरण में कोई उत्तेजना या हलचल होती है, तो कोशिकाएं उन्हें समझ जाती हैं।

प्रजनन कार्य 

नई कोशिकाओं को उत्पन्न करने के लिए, कोशिकाएं प्रजनन कार्य को करती हैं। और वे इसे समसूत्रण (Mitosis) के माध्यम से करती  हैं, जो तब होता है, जब कोशिका दो नई समान कोशिकाओं को उत्पन्न करती है, या अर्धसूत्रीविभाजन द्वारा करती हैं, जब कोशिका चार अलग-अलग नई कोशिकाओं को उत्पन्न करती है।

पोषण कार्य 

ऊर्जा प्राप्त करने के लिए कोशिका को कार्बनिक पदार्थों पर निर्भर होने की आवश्यकता होती है।

जब कोशिकाएं अकार्बनिक पदार्थ (कार्बन डाइऑक्साइड, पानी, खनिज लवण) से अपना स्वयं का कार्बनिक पदार्थ (अर्थात भोजन) पैदा करती हैं, तो इसे इस तरह की कोशिकाओं को स्वपोषी कोशिका कहा जाता है। कुछ प्रकार के बैक्टीरिया, शैवाल और पौधों में इस प्रकार की कोशिकाएं पायी जाती हैं।

यदि कोशिका को अन्य जीवों से कार्बनिक पदार्थ (अर्थात भोजन) प्राप्त होता है, तो इस तरह की कोशिकाओं को विषमपोषी कोशिका कहा जाता है। यह जानवरों, मनुष्यों, कवक और कुछ प्रकार के जीवाणुओं में पायी जाती हैं|

कोशिका का चित्र | Koshika Ka Chitra

जंतु कोशिका, जंतु कोशिका की परिभाषा और उसके विभिन्न प्रकार | Jantu Koshika

जो बहुकोशिकीय जीव हैं, उनमें जंतु कोशिका जंतुओं के ऊतकों की एक बुनियादी और महत्वपूर्ण कार्यात्मक इकाई है। पादप कोशिका की तरह, यह एक प्रकार की यूकेरियोटिक कोशिकाएं होती हैं, जिसमें नाभिक और कई विशिष्ट अंग होते हैं। 

मानव शरीर में कई तरह की कोशिकाएं पायी जाती हैं, और इसी प्रकार जंतुओं में भी कई तरह की कोशिकाएं उपस्थित होती हैं। 

हम नीचे विभिन्न प्रकार की जंतु कोशिकाओं और उनके कार्यों वर्णन करेंगे। जंतु कोशिका के प्रकार-

उपकला कोशिकाएं (Epithelial cells)

आमतौर पर उपकला कोशिकाएं जंतुओं के अंगों की दीवारों में पाई जाने वाली कोशिकाएं होती हैं, ये कोशिकाएं उपकला ऊतकों का निर्माण करती हैं। जिस अंग में ये स्थित होती हैं, उनके आधार पर इनमें कई अलग-अलग प्रकार की विशेषताएं पायी जाती हैं। यही विशेषताएं उनके कार्य को निर्धारित करती है।

उदाहरण के लिए, पोषक तत्वों के अवशोषण के लिए छोटी आंत में उपकला कोशिकाओं में माइक्रोविली (Microvilli) होती है जो  सतह क्षेत्र को बढ़ाने में मददगार होती है।

तंत्रिका कोशिकाएँ (Nerve cells)

दो प्रकार की कोशिकाएँ तंत्रिका ऊतकों को बनाती हैं: 

  • न्यूरॉन्स कोशिकाएँ (Neurons cells)
  • ग्लायल कोशिकाएँ (Glial cells)

न्यूरॉन्स कोशिकाएं वे कोशिकाएं होती हैं, जो तंत्रिका आवेगों को गुणसूत्रीयसंयोजन (Synapses) के माध्यम से प्रसारित करने में महत्वपूर्ण होती हैं, जो न्यूरॉन्स के बीच या एक न्यूरॉन और एक मांसपेशी कोशिका के बीच की कड़ी हैं।

जबकि, ग्लायल कोशिकाएं तंत्रिका आवेगों को संचारित नहीं करती हैं, लेकिन वे न्यूरॉन्स का सहयोग और सुरक्षा करती हैं। अपने कार्य के कारण, इन दो प्रकार की कोशिकाओं में एक शाखित या तारे का आकार होता है, और यही उनके बीच संचार की सुविधा प्रदान करता है।

मांसपेशियों की कोशिकायें (Muscle cells)

पेशी कोशिकाएँ तीन मुख्य प्रकार की होती हैं-

  • चिकनी मांसपेशी कोशिकाएं,
  • कंकाल की मांसपेशियों में स्थित धारीदार मांसपेशी कोशिकाएं, और 
  • हृदय में पेशी कोशिकाएं, जिन्हें कार्डियोमायोसाइट्स (Cardiomyocytes) कहा जाता है। 

ये कोशिकाएं रासायनिक ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलकर ग्रहण करने में सक्षम होती हैं। इन कोशिकाओं के आकार भिन्न-भिन्न होते हैं, क्योंकि यह उनके द्वारा बनाए गए ऊतकों पर निर्भर करता है। चिकनी पेशियाँ आकार में लम्बी होती है, कंकाल और हृदय की पेशियों में धारियाँ होती हैं, जबकि ह्रदय पेशियों में संकुचन होता है।

रक्त कोशिकाएं (Blood cells) 

जंतुओं में रक्त कोशिकाएं तीन अलग-अलग प्रकार की होती हैं:

  • लाल रक्त कोशिकाएं (Erythrocytes), 
  • श्वेत रक्त कोशिकाएं (Leukocytes), और 
  • प्लेटलेट्स (Platelets)। 

इन तीनों में लाल रक्त कोशिकाएं सबसे खास और महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये शरीर की एकमात्र कोशिकाएं हैं, जिनमें नाभिक नहीं होता है। 

ये सारी कोशिकाएं आमतौर पर रक्त के माध्यम से चलती हैं और लाल रक्त कोशिकाएं ऑक्सीजन और CO2 के आवागमन और विनिमय में महत्वपूर्ण होती हैं, श्वेत रक्त कोशिकाएं प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के लिए एंटीबॉडी का उत्पादन करने में महत्वपूर्ण होती हैं, इसके अतिरिक्त ये रक्त परिसंचरण प्रणाली को बनाए रखने के लिए थक्का बनाने में भी महत्वपूर्ण होती हैं।

वसा कोशिकाएं (Fat cells)

ये बड़ी कोशिकाएं होती हैं, जिनका कार्य ऊर्जा को अपने भीतर वसायुक्त अम्ल (Fatty acids) के रूप में संग्रहीत करना, प्रोटीन और हार्मोन को स्रावित करना और थर्मल और यांत्रिक सुरक्षा के रूप में कार्य करना होता है।

अस्थि कोशिकाएं (Bone cells)

अस्थि कोशिकाएं हड्डियों के विकास और क्षरण के लिए जिम्मेदार होती हैं। ये तीन प्रकार की होती हैं: ऑस्टियोब्लास्ट (Osteoblasts), ऑस्टियोक्लास्ट (Osteoclasts) और ऑस्टियोसाइट्स (Osteocytes)।

जंतु कोशिका का चित्र | Jantu Koshika Ka Chitra

पादप कोशिका का चित्र | Padap Koshika Ka Chitra

पादप कोशिका और जंतु कोशिका में अंतर स्पष्ट करो | Padap and Jantu Koshika Ka Antar

पादप और जंतु कोशिका में अंतर यह है कि पादप कोशिका पौधों में और जंतु कोशिका जंतुओं में होती है। किसी भी जीव के सबसे जरुरी इकाइयों में से एक होते हैं ये कोशिकाएं। इनका जीवित रहना ही इन प्राणियों के जीवन का आधार है।

पशु कोशिका में कोशिका भित्ति का अभाव होता है, पादप कोशिका के विपरीत जिसमें सेल्युलोसिक कोशिका भित्ति होती है। पशु कोशिका में क्लोरोप्लास्ट की कमी होती है, जबकि पादप कोशिका में क्लोरोप्लास्ट होता है।

पशु कोशिका में सेंट्रीओल्स, सेंट्रोसोम और लाइसोसोम होते हैं लेकिन पादप कोशिका में इनकी कमी होती है। यह पौधे और पशु कोशिका में भी कुछ अंतर है।

पादप कोशिकाजंतु कोशिका
पादप कोशिका में कोशिका भित्ति उपस्थिति होती है।जंतु कोशिका में कोशिका भित्ति अनुपस्थिति होती है।
पादप कोशिका में हरितलवक पाया जाता है।जंतु कोशिका में हरितलवक नहीं पाया जाता है।
पादप कोशिकाओं में बड़ी रिक्तियां होती है।जंतु कोशिकाओं में रिक्तियां कम होती है या होती ही नहीं है।
पादप कोशिका और जंतु कोशिका में अंतर

मानव शरीर की सबसे बड़ी कोशिका, सबसे बड़ी कोशिका | Sabse Badi Koshika

मादा अंडा कोशिका (डिंब) मानव शरीर की सबसे बड़ी कोशिका है।

अंडाशय गर्भाशय के दोनों ओर छोटी, अंडाकार आकार की ग्रंथियां होती हैं। वे आपके अंडों (जिन्हें डिंब के रूप में भी जाना जाता है) के उत्पादन और भंडारण के साथ-साथ आपके मासिक धर्म चक्र और गर्भावस्था को नियंत्रित करने वाले हार्मोन के उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैं। आपका एक अंडाशय ओव्यूलेशन के दौरान अंडा जारी करता है। यदि कोई शुक्राणु इस अंडे को निषेचित करता है तो आप गर्भवती हो सकती हैं।

कोशिकाएँ जीवन की मूलभूत इकाई हैं। रॉबर्ट हुक ने 1665 में कोशिकाओं की खोज की और मठवासी कोशिकाओं से समानता के लिए उनका नाम रखा। सेल शब्द लैटिन शब्द “छोटे कमरे” से आया है। दो मुख्य प्रकार की कोशिकाएं यूकेरियोटिक और प्रोकैरियोटिक हैं। यूकेरियोटिक कोशिकाओं में एक नाभिक होता है, जबकि प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में एक न्यूक्लियॉइड क्षेत्र होता है। दोनों में डीएनए होता है।

  • लगभग 4 अरब साल पहले पृथ्वी पर पहली कोशिकाएं दिखाई दीं। वे प्रोकैरियोटिक कोशिकाएं थीं।
  • आप अधिकांश कोशिकाओं को बिना सूक्ष्मदर्शी के नहीं देख सकते।
  • मानव शरीर में लगभग 40 ट्रिलियन कोशिकाएं होती हैं।
  • समान कोशिकाओं के समूह ऊतक बना सकते हैं, जबकि विभिन्न ऊतकों के समूह अंगों का निर्माण कर सकते हैं
  • कोशिकाओं में परिवर्तनशील जीवन काल होता है, जो कुछ दिनों से लेकर जीव के जीवनकाल तक होता है।
  • मानव शरीर की सबसे छोटी कोशिका नर युग्मक, यानी शुक्राणु है।
  • सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग का अंडा है।
  • सबसे लंबी कोशिका तंत्रिका कोशिका होती है।
  • सबसे छोटी कोशिका माइकोप्लाज्मा है।

मानव शरीर की सबसे छोटी कोशिका, सबसे छोटी कोशिका | Sabse Chhoti Koshika

मानव शरीर की सबसे छोटी कोशिका नर युग्मक, यानी शुक्राणु है।

माइकोप्लाज्मा सबसे छोटी जीवित कोशिका है जिसमें कोशिका भित्ति नहीं होती है और यह बिना ऑक्सीजन के जीवित रह सकती है। वे ऐच्छिक अवायवीय हैं, इसलिए वे एम. निमोनिया को छोड़कर ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में अवायवीय मोड में बदल सकते हैं, जो एक सख्त एरोब है।

  • पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे छोटे जीवों को अलग अलग पहलुओं के अनुसार चयनित किया जाता है, जिसमें आयतन, द्रव्यमान, ऊंचाई, लंबाई या जीनोम का आकार शामिल होता हैं।
  • 1665 में, कोशिका की खोज रॉबर्ट हुक ने की थी उन्होंने स्वनिर्मित सूक्ष्मदर्शी (self-made microscope) से काम की पतली काट को देखा था। जिसमें मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना दिखाई दी थी। लेटिन भाषा में कोशिका का अर्थ छोटा कमरा होता है।
  • माइकोप्लाज्मा, मॉलिक्यूट्स वर्ग की एक जाति है, जिसमें 100 से अधिक प्रजातियां शामिल हैं।
  • वे लोगों, जानवरों और पौधों पर परजीवी या सहभोजी के रूप में रहते हैं।
  • जीनस माइकोप्लाज्मा आर्थ्रोपोड्स और वर्टेब्रेट्स में रहता है।
  • माइकोप्लाज्मा और फाइटोप्लाज्मा में कोडन पूर्वाग्रह और जीनोम के विकास को प्रभावित करने के लिए आहार नाइट्रोजन की उपलब्धता को दिखाया गया है।
  • माइकोप्लाज़्मा प्रजातियाँ, जिनका व्यास 0.2 से 0.3 मीटर तक होता है, सबसे छोटे मुक्त जीवों में से हैं।
  • वे प्लूरोपोन्यूमोनिया से पीड़ित मवेशियों की फुफ्फुस गुहाओं में पाए गए थे। इन जीवों को एमएलओ (मायकोप्लाज्मा-लाइक ऑर्गेनिज्म) या पीपीएलओ (पहले) (प्लुरोपोन्यूमोनिया-जैसे जीव) के रूप में भी जाना जाता है।

मानव कोशिका का चित्र | Human Cell

किसकी स्थापना किसने की | Koshika Siddhant Kisne Diya

कोशिका सिद्धांत का प्रतिपादन वनस्पतिशास्त्री श्लोईडेन और प्राणीशास्त्री श्वान ने 1838-39 में किया था.जर्मन पादप वैज्ञानिक श्लाइडेन एवं जन्तु वैज्ञानिक श्वान ने अपने-अपने खोजों के आधार पर कोशिका के बारे में जो मत प्राप्त दिएं हैं उसे ही कोशिका सिद्धान्त कहते हैं। इसके अनुसार कोशिका सजीवों की रचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। नई कोशिका की उत्पत्ति पहले से मौजूद कोशिकाओं से होती है। सभी सजीवों का शरीर एक या अनेक कोशिकाओं से बना होता है।

कोशिका की खोज रॉबर्ट हूक ने १६६५ ई० में किया। १८३९ ई० में श्लाइडेन तथा श्वान ने कोशिका सिद्धान्त प्रस्तुत किया जिसके अनुसार सभी सजीवों का शरीर एक या एकाधिक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है तथा सभी कोशिकाओं की उत्पत्ति पहले से उपस्थित किसी कोशिका से ही होती है।

कोशिकाभित्ति कहाँ पाई जाती है | Koshika Bhitti Kahan Pai Jaati Hai

जीवाणु एवं वनस्पति कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली के बाहर निर्जीव, पारगम्य तथा मोटी दीवाल पायी जाती है उसे कोशिका भित्ति कहते हैं। वनस्पति कोशिका में यह कोशिका झिल्ली के बाहर किन्तु जीवाणु में स्लाइम पर्त के नीचे रहती है।

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FAQ | कोशिका क्या है

Q1. कोशिका की खोज कब हुई

Ans – वर्ष 1665 में इंग्लैंड के वैज्ञानिक रॉबर्ट हुक जब बोतल के कॉर्क का अध्ययन कर रहे थे। तब सूक्ष्मदर्शी से अध्ययन करते समय उन्होंने कॉर्क की मृत कोशिकाओं को देखा। इसे पादप कोशिका कहते हैं। कोशिकाओं की खास बात यह है कि यह अपने आप की संख्या बाधा सकते हैं। कोशिका को अंग्रेजी में सेल (Cell) कहते हैं।

Q2. कोशिका विभाजन किसे कहते हैं

Ans – कोशिका विभाजन का आशय उस प्रक्रिया से है, जिसके अन्तर्गत एक कोशिका से दो कोशिकाओं का निर्माण होता है, जिससे जीवों में प्रजनन और वृद्धि सम्भव हो पाती है। इस घटना में पहले DNA का द्विगुणन और फिर केन्द्रक तथा कोशिकाद्रव्य का विभाजन होता है।  कोशिका विभाजन सभी जीवों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसमे कोशिका विभाजन के दौरान डीएनए प्रतिकृति व कोशिका वृद्धि होती है।

Q3. कोशिका सिद्धांत किसे कहते हैं

Ans – जर्मन पादप वैज्ञानिक श्लाइडेन एवं जन्तु वैज्ञानिक श्वान ने अपने-अपने खोजों के आधार पर कोशिका के बारे में जो मत प्राप्त दिएं हैं उसे ही कोशिका सिद्धान्त कहते हैं। इसके अनुसार कोशिका सजीवों की रचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। नई कोशिका की उत्पत्ति पहले से मौजूद कोशिकाओं से होती है। सभी सजीवों का शरीर एक या अनेक कोशिकाओं से बना होता है। प्रत्येक कोशिका का निर्माण सजीव द्रव्य जीव द्रव्य से हुआ है।

Q4. कोशिका विभाजन कितने प्रकार का होता है

Ans – रानी कोशिका का विभाजित होकर नयी कोशिकाओं का निर्माण करना कोशिका विभाजन कहलाता है| कोशिका विभाजन को सर्वप्रथम 1955 ई. में विरचाऊ ने देखा था| कोशिकाओं का विभाजन तीन तरीकों- असूत्री (Amitosis ), समसूत्री (Mitosis) और अर्द्धसूत्री (Meiosis) से होता है।

Q5. मनुष्य के शरीर में कितनी कोशिकाएं होती है

Ans – मानव शरीर लगभग 200 विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से बना है, प्रत्येक एक अद्वितीय संरचना, आकार, आकार और जीवों के सेट के साथ। 
प्रत्येक प्रकार की कोशिका को एक विशिष्ट कार्य करने के लिए अनुकूलित किया जाता है।

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